bhagat singh nephew :चंडीगढ़ निगम कि अफसरों ने किया परेशान bhagat singh nephew :चंडीगढ़ निगम कि अफसरों ने किया परेशान
Search
bhagat singh nephew

सहीद भगत सिंह कि भतीजे को चंडीगढ़ निगम कि अफसरों ने किया परेशान

25

भगत सिंह के भतीजे ने टाइल्स लगाने का लिया था ठेका

सही समय पर काम पूरा करने के बाद भी चक्कर लगवाते रहे अफसर

कोर्ट ने दिए कार्रवाई के आदेश, प्रशासनिक अफसर 6 माह से आदेश दबाए रहे

Chandigarh : सहीद ए आज़म सरदार Bhagat SIngh के भतीजे (Bhagat singh nephew) अभय संधू को भारत सरकार के अफसरों ने चक्कर लगवा लगवा कर ऐसा तंग परेशान किया के उसको कोर्ट का सहारा लेना पड़ा . कहानी यह है कि Chandigarh नगर निगम के अधिकारी एक सड़क बनाने का भुगतान करने के नाम पर 18 साल से चक्कर लगवा रहे हैं। पूर्व पार्षद और एडवोकेट सतिंदर सिंह की शिकायत पर कोर्ट ने निगम कि जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। जिसके बाद सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ने यूटी (यूनियन टेरिटरी) प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए पत्र जारी किया है।

कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन 6 महीने तक पत्र दबाए रहा :

पिछले साल नवंबर में जिला अदालत ने संधू (Bhagat singh nephew) के हक में फैसला सुनाया और निगम को उनके 4 लाख रुपए ब्याज समेत लौटाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने निगम पर 30 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया था। एडवोकेट ने बताया कि उन्होंने पिछले साल फरवरी में सेंट्रल विजिलेंस कमीशन को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी।

विजिलेंस ने 29 जून 2018 को प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन, प्रशासनिक अफसरों ने छह महीने तक इस पत्र को दबाए रखा। अब दो महीने पहले जब कोर्ट ने नगर निगम के खिलाफ फैसला सुनाया तो प्रशासन ने कार्रवाई के लिए पत्र लिख दिया।

Bhagat singh nephew की कंपनी ने किया था काम :

निगम ने 1999 में सेक्टर-11 के वी-4 रोड पर टाइल्स लगाने का टेंडर निकाला था। 22 फरवरी 2000 को निगम ने संधू की कंपनी एकेएस टाइल्स को ये टेंडर अलॉट कर दिया। उन्होंने मई 2000 में काम पूरा कर दिया, लेकिन निगम ने यह कहते हुए भुगतान रोक दिया कि उन्होंने आईएसआई मार्क की टाइल्स नहीं लगाई। जबकि संधू का कहना था कि उनकी टाइल्स आईएसआई मार्क की नहीं थी, लेकिन क्वालिटी उनकी बेहतर थी।

संधू ने बताया कि निगम ने इस काम के लिए पहले टेंडर निकाला था, लेकिन तब कोई भी ऐसी कंपनी नहीं मिली थी, जो आईएसआई मार्क की टाइल्स बनाती हो, इसलिए निगम ने कंडिशन बदलकर दोबारा टेंडर निकाला था। जिसमें आईएसआई की कंडिशन हटा दी और फिर उनकी कंपनी को काम अलॉट हुआ।

ऐसे चली कानूनी लड़ाई

फरवरी 2006 में संधू ने निगम के खिलाफ भुगतान न करने पर सिविल सूट फाइल किया था।
नवंबर 2012 में सिविल कोर्ट ने उनका केस ऑर्बिट्रेटर को रेफर कर दिया। जुलाई 2016 में ऑर्बिट्रेटर एनपी शर्मा, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर ने नगर निगम के खिलाफ फैसला सुनाया।
सितंबर 2016 में नगर निगम ने ऑर्बिट्रेटर के फैसले को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चैलेंज किया।
नवंबर 2018 में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने नगर निगम की याचिका को खारिज कर दिया और निगम को संधू का पैसा लौटाने के निर्देश दिए।

Also Read : AZAD SOCH PUNJABI NEWSPAPER




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *