Plastic Rice : कहीं आप भी तो नहीं खा रहे प्लास्टिक से बने ब्राऊन राइस ? Plastic Rice : कहीं आप भी तो नहीं खा रहे प्लास्टिक से बने ब्राऊन राइस ?
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कहीं आप भी तो नहीं खा रहे प्लास्टिक से बने ब्राऊन राइस ? ऐसे करें पहचान

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NEW DELHI। भारत में असली चीज बाद में आती है लेकिन उसकी नक़ल पहले हो जाती है मगर अगर नक़ल आपके शरीर के लिए जहर है तो इससे जान भी जा सकती है . अब भारती बज़ारों में प्लास्टिक राइस Plastic Rice का चलन ज्यादा बढ़ गया है जिससे लोगों के सेहत के साथ बड़ी बड़ी कंपनियां खिलवाड़ कर रही हैं .

पिछले कुछ साल से भारती बाजार में पारम्परिक खाद्य पदार्थों (Food items) की जगह नए विकल्प पेश किए जा रहे हैं। जैसे व्हाइट राइस (White Rice) की जगह ब्राऊन (Brown Rice) को अधिक हैल्दी विकल्प (Healthy Option) कहा जाता है। डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों के लिए भी अलग तरह के चावल बाजार में मौजूद हैं जिन्हें ‘डायबिटीज फ्रैंडली’ कह कर बेचा जाता है लेकिन जरूरी नहीं कि अच्छी पैकेजिंग में मिलने वाले ये प्रोडक्ट्स सेहत के लिए भी अच्छे हों।

एक ताजा रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि अच्छी पैकिंग में दिखने वाली खाने पीने कि चीजें भी आप कि लिए हानिकारक हो सकती हैं । मद्रास डायबिटिक रिसर्च फाऊंडेशन (Madras Diabetes Research Foundation ) (एम.डी.आर.एफ.) के फूड साइंटिस्ट्स (Food scientists) द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। जिस में बताया गया है कि ब्राउन चावल Brown Rice के नाम पर लोगों को प्लास्टिक के चावल Plastic Rice वेचे जा रहे हैं जो के खाने वाले कि जान के दुश्मन बनते हैं

Plastic Rice: 15 तरह के चावलों पर की थी रिसर्च

कंपनी के सूत्रों के मुताबिक एमडीआरए. के वैज्ञानिकों ने सुपर मार्कीट के 15 तरह के ‘हैल्दी’ चावलों पर अपनी रिसर्च की थी । इस रिसर्च में सामने आया कि पैकेट पर जो दावे किए गए उनमें ज्यादातर झूठे हैं। जिन को ब्राउन राइस बोल कर वेचा जाता हैं वह दरअसल इन चावलों को आधा उबाला जाता है और फिर इन पर पॉलिश की जाती है। आधे उबले होने की वजह से उनका कलर ब्राऊन हो जाता है।

शूगर-फ्री नहीं हो सकता है चावल : विज्ञानकों दावा

जो चावल हमें ब्राऊन राइस Brown Rice कह कर वेचे जाते हैं उन आधे उबाले गए चावल को ब्राऊन राइस कह कर बेचा जाता हैं। पकाते वक्त यह चावल और ज्यादा पानी सोखते हैं, जिससे उनमें स्टार्च का स्तर बढ़ता है। इसके चलते इनमें जीआई का स्तर भी बढ़ जाता है। यही नहीं शूगर फ्री और जीरो-कोलैस्ट्रॉल वाले राइस के बारे में किए जाने वाले दावे भी इस शोध में झूठे साबित हुए। इस शोध में शामिल शोभना नामक एक विज्ञानी का कहना है कि चावल में जो स्टार्च होता है, वह पाचन के वक्त ग्लूकोज में बदल जाता है। इस तरह कोई भी चावल शूगर फ्री नहीं हो सकता।

चावलों कि जाँच में चौकाने वाले नतीजे सामने

चावलों कि जांच में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं । इसमें सबसे चौंकाने वाला नतीजा ब्राऊन राइस Brown Rice के एक ब्रांड का आया जिसका दावा था कि उसका ग्लाइसेमिक इंडैक्स (जी.आई.) महज 8.6 है। वासुदेवन के मुताबिक इंटरनैशनल जीआई टेबल में किसी चावल में इतने कम जीआई का आज तक कभी कोई जिक्र ही नहीं किया गया है। चावल में निम्नतम जी.आई. करीब 40 के आस-पास पाया गया है। जीआई किसी खाद्य पदार्थ में कार्बोहाइड्रेट का स्तर बताता है। कार्बोहाइड्रेट से खून में ग्लूकोज का स्तर प्रभावित होता है। कम जी.आई. वाले खाद्य पदार्थ सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं।

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